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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः प्रभाते राजा स धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः |  १   क
आहूय़ पाण्डवान्वीरान्वनवासकृतक्षणः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति