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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
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वैशम्पाय़न उवाच
तथा कृष्णा द्रौपदी यादवी च; वालापत्या चोत्तरा कौरवी च |  १०   क
चित्राङ्गदा याश्च काश्चित्स्त्रिय़ोऽन्याः; सार्धं राज्ञा प्रस्थितास्ता वधूभिः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति