menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
या नापश्यच्चन्द्रमा नैव सूर्यो; रामाः कदाचिदपि तस्मिन्नरेन्द्रे |  १३   क
महावनं गच्छति कौरवेन्द्रे; शोकेनार्ता राजमार्गं प्रपेदुः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति