सभा पर्व  अध्याय २१

वैशम्पाय़न उवाच

अवमुच्य किरीटं स केशान्समनुमृज्य च |  ६   क
उदतिष्ठज्जरासन्धो वेलातिग इवार्णवः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति