वन पर्व  अध्याय २१

वासुदेव उवाच

सैनिकान्मम सूतं च हय़ांश्च समवाकिरत् |  २०   क
अचिन्तय़न्तस्तु शरान्वय़ं युध्याम भारत ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति