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विराट पर्व
अध्याय २१
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्य तत्कुर्वतः कर्म कालो दीर्घ इवाभवत् |  २१   क
अनुचिन्तय़तश्चापि तामेवाय़तलोचनाम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति