menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
विराट पर्व
अध्याय २१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
आसीदभ्यधिका चास्य श्रीः श्रिय़ं प्रमुमुक्षतः |  २२   क
निर्वाणकाले दीपस्य वर्तीमिव दिधक्षतः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति