विराट पर्व  अध्याय २१

वैशम्पाय़न उवाच

पातितो भुवि भीमस्तु कीचकेन वलीय़सा |  ५१   क
उत्पपाताथ वेगेन दण्डाहत इवोरगः ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति