menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
विराट पर्व
अध्याय २१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
क्रोधाविष्टो विनिःश्वस्य पुनश्चैनं वृकोदरः |  ५७   क
जग्राह जय़तां श्रेष्ठः केशेष्वेव तदा भृशम् ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति