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विराट पर्व
अध्याय २१
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रवादेन हि मत्स्यानां राजा नाम्नाय़मुच्यते |  ९   क
अहमेव हि मत्स्यानां राजा वै वाहिनीपतिः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति