उद्योग पर्व  अध्याय २१

वैशम्पाय़न उवाच

दुर्योधनो भय़ाद्विद्वन्न दद्यात्पदमन्ततः |  १२   क
धर्मतस्तु महीं कृत्स्नां प्रदद्याच्छत्रवेऽपि च ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति