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आदि पर्व
अध्याय ५३
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सूत उवाच
स यज्ञः पाण्डवेय़स्य राज्ञः पारिक्षितस्य ह |  १०   क
प्रीतिमांश्चाभवद्राजा भारतो जनमेजय़ः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति