अनुशासन पर्व  अध्याय ५१

नहुष उवाच

सहस्रं दीय़तां मूल्यं निषादेभ्यः पुरोहित |  ६   क
निष्क्रय़ार्थं भगवतो यथाह भृगुनन्दनः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति