शल्य पर्व  अध्याय २१

सञ्जय़ उवाच

वाणभूतामपश्याम पृथिवीं पृथिवीपते |  ६   क
दुर्योधनेन प्रकृतां क्षिप्रहस्तेन धन्विना ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति