menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१०
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
त्रिविधं संस्थिता ह्येते पञ्च पञ्च पृथक्पृथक् |  १४   क
मुष्णन्त्यत्र स्थिता ह्येते स्वर्गतो यज्ञय़ाजिनः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति