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वन पर्व
अध्याय २१०
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मार्कण्डेय़ उवाच
हविर्वेद्यां तदादानं कुशलैः सम्प्रवर्तितम् |  १६   क
तदेते नोपसर्पन्ति यत्र चाग्निः स्थितो भवेत् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति