आदि पर्व  अध्याय २११

वासुदेव उवाच

स त्वमर्जुन कल्याणीं प्रसह्य भगिनीं मम |  २३   क
हर स्वय़ंवरे ह्यस्याः को वै वेद चिकीर्षितम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति