आदि पर्व  अध्याय २११

वैशम्पाय़न उवाच

धर्मराजाय़ तत्सर्वमिन्द्रप्रस्थगताय़ वै |  २५   क
श्रुत्वैव च महावाहुरनुजज्ञे स पाण्डवः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति