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आदि पर्व
अध्याय २११
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रासादै रत्नचित्रैश्च गिरेस्तस्य समन्ततः |  ३   क
स देशः शोभितो राजन्दीपवृक्षैश्च सर्वशः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति