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शान्ति पर्व
अध्याय २११
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भीष्म उवाच
अविद्यां क्षेत्रमाहुर्हि कर्म वीजं तथा कृतम् |  ३२   क
तृष्णासञ्जननं स्नेह एष तेषां पुनर्भवः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति