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वन पर्व
अध्याय २११
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मार्कण्डेय़ उवाच
कपिलं परमर्षिं च यं प्राहुर्यतय़ः सदा |  २१   क
अग्निः स कपिलो नाम साङ्ख्ययोगप्रवर्तकः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति