वन पर्व  अध्याय २११

मार्कण्डेय़ उवाच

प्रशान्तेऽग्निर्महाभाग परिश्रान्तो गवाम्पतिः |  ७   क
असुराञ्जनय़न्घोरान्मर्त्यांश्चैव पृथग्विधान् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति