menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
छत्राणि वालव्यजनानुषङ्गा; दीप्ता महोल्काश्च तथैव राजन् |  १९   क
व्याघूर्णमानाश्च सुवर्णमाला; व्याय़च्छतां तत्र तदा विरेजुः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति