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विराट पर्व
अध्याय २३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा नर्तनागारे धनञ्जय़मपश्यत |  १७   क
राज्ञः कन्या विराटस्य नर्तय़ानं महाभुजम् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति