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आदि पर्व
अध्याय २१३
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वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्य स राजानं विनय़ेन समाहितः |  १४   क
अभ्यर्च्य व्राह्मणान्पार्थो द्रौपदीमभिजग्मिवान् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति