आदि पर्व  अध्याय २१३

वैशम्पाय़न उवाच

तांश्च वृष्ण्यन्धकश्रेष्ठान्धर्मराजो युधिष्ठिरः |  ३८   क
प्रतिजग्राह सत्कारैर्यथाविधि यथोपगम् ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति