शान्ति पर्व  अध्याय २३४

व्यास उवाच

निःस्तुतिर्निर्नमस्कारः परित्यज्य शुभाशुभे |  ९   क
अरण्ये विचरैकाकी येन केनचिदाशितः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति