शान्ति पर्व  अध्याय ३०९

भीष्म उवाच

फेनपात्रोपमे देहे जीवे शकुनिवत्स्थिते |  ६   क
अनित्ये प्रिय़संवासे कथं स्वपिषि पुत्रक ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति