वन पर्व  अध्याय २१३

कन्यो उवाच

अवलाहं महावाहो पतिस्तु वलवान्मम |  २१   क
वरदानात्पितुर्भावी सुरासुरनमस्कृतः ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति