वन पर्व  अध्याय २१३

कन्यो उवाच

देवदानवय़क्षाणां किंनरोरगरक्षसाम् |  २३   क
जेता स दृष्टो दुष्टानां महावीर्यो महावलः ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति