वन पर्व  अध्याय २१३

मार्कण्डेय़ उवाच

अथापश्यत्स उदय़े भास्करं भास्करद्युतिः |  २६   क
सोमं चैव महाभागं विशमानं दिवाकरम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति