menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१३
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
सा तं ज्ञात्वा यथावत्तु वह्निं वनमुपागतम् |  ५१   क
तत्त्वतः कामसन्तप्तं चिन्तय़ामास भामिनी ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति