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आदि पर्व
अध्याय २१४
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वैशम्पाय़न उवाच
स हि सर्वस्य लोकस्य हितमात्मन एव च |  १२   क
चिकीर्षुः सुमहातेजा रेमे भरतसत्तमः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति