आदि पर्व  अध्याय २१४

वैशम्पाय़न उवाच

काश्चित्प्रहृष्टा ननृतुश्चुक्रुशुश्च तथापराः |  २३   क
जहसुश्चापरा नार्यः पपुश्चान्या वरासवम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति