menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१४
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
दिव्यरूपमरुन्धत्याः कर्तुं न शकितं तय़ा |  १४   क
तस्यास्तपःप्रभावेण भर्तृशुश्रूषणेन च ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति