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वन पर्व
अध्याय २१४
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मार्कण्डेय़ उवाच
पर्वताश्च नमस्कृत्य तमेव पृथिवीं गताः |  ३७   क
अथाय़मभजल्लोकः स्कन्दं शुक्लस्य पञ्चमीम् ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति