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आदि पर्व
अध्याय २१५
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वैशम्पाय़न उवाच
शरैश्च मेऽर्थो वहुभिरक्षय़ैः क्षिप्रमस्यतः |  १५   क
न हि वोढुं रथः शक्तः शरान्मम यथेप्सितान् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति