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शान्ति पर्व
अध्याय २१५
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युधिष्ठिर उवाच
यदिदं कर्म लोकेऽस्मिञ्शुभं वा यदि वाशुभम् |  १   क
पुरुषं योजय़त्येव फलय़ोगेन भारत ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति