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शान्ति पर्व
अध्याय २१५
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भीष्म उवाच
कर्मजं त्विह मन्येऽहं फलय़ोगं शुभाशुभम् |  २४   क
कर्मणां विषय़ं कृत्स्नमहं वक्ष्यामि तच्छृणु ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति