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शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
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भीष्म उवाच
त्वय़ापि सततं राजन्नभ्यर्च्यः पुरुषोत्तमः |  ११९   क
स हि माता पिता चैव कृत्स्नस्य जगतो गुरुः ||  ११९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति