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अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
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वासुदेव उवाच
अवसन्मद्गृहे तात व्राह्मणो हरिपिङ्गलः |  १२   क
चीरवासा विल्वदण्डी दीर्घश्मश्रुनखादिमान् |  १२   ख
दीर्घेभ्यश्च मनुष्येभ्यः प्रमाणादधिको भुवि ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति