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आदि पर्व
अध्याय २१६
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अर्जुन उवाच
चक्रमस्त्रं च वार्ष्णेय़ो विसृजन्युधि वीर्यवान् |  २८   क
त्रिषु लोकेषु तन्नास्ति यन्न जीय़ाज्जनार्दनः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति