आदि पर्व  अध्याय २१६

वैशम्पाय़न उवाच

सर्वतः परिवार्याथ सप्तार्चिर्ज्वलनस्तदा |  ३२   क
ददाह खाण्डवं क्रुद्धो युगान्तमिव दर्शय़न् ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति