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शान्ति पर्व
अध्याय २२१
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भीष्म उवाच
चक्रे चानुपमां पूजां तस्याश्चापि स सर्ववित् |  १७   क
देवराजः श्रिय़ं राजन्वाक्यं चेदमुवाच ह ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति