आदि पर्व  अध्याय २१७

वैशम्पाय़न उवाच

खाण्डवे दह्यमाने तु भूतान्यथ सहस्रशः |  ४   क
उत्पेतुर्भैरवान्नादान्विनदन्तो दिशो दश ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति