अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

अति दानानि सर्वाणि पृथिवीदानमुच्यते |  २   क
अचला ह्यक्षय़ा भूमिर्दोग्ध्री कामाननुत्तमान् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति