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कर्ण पर्व
अध्याय ४५
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भीम उवाच
त्वमेव जानीहि महानुभाव; राज्ञः प्रवृत्तिं भरतर्षभस्य |  ६२   क
अहं हि यद्यर्जुन यामि तत्र; वक्ष्यन्ति मां भीत इति प्रवीराः ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति