आदि पर्व  अध्याय २१८

वैशम्पाय़न उवाच

न शशाक विनिर्गन्तुं कौन्तेय़शरपीडितः |  ६   क
मोक्षय़ामास तं माता निगीर्य भुजगात्मजा ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति