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शान्ति पर्व
अध्याय २१८
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शक्र उवाच
अय़नं तस्य षण्मासा उत्तरं दक्षिणं तथा |  ३६   क
येन संय़ाति लोकेषु शीतोष्णे विसृजन्रविः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति