शान्ति पर्व  अध्याय २१८

श्रीरु उवाच

न मा विरोचनो वेद न मा वैरोचनो वलिः |  ७   क
आहुर्मां दुःसहेत्येवं विधित्सेति च मां विदुः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति